सोनू- जब ये पहली बार पालना में मिला तो ये नन्ही सी जान बहुत दर्द में थी लेकिन अपना दर्द ये कैसे किसी को बताता। सोनू को ऑस्टियोपोरोसिस था जिसमें हड्डियां इतनी कमज़ोर हो जाती है कि ज़रा से दबाव से भी टूट जाती है। डॉक्टर का कहना था कि ये शायद ही एक जगह से कभी उठ पाए या बाकी बच्चो की तरह चल पाए पर इस बहादुर बच्चे ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से इसे गलत साबित कर दिखाया। आज सोनू स्कूल भी जाता है, खेलता भी है चलने भी आज भी उसे दिक्कत है लेकिन इसने उसे अपनी कमजोरी नहीं बन ने दिया.. सोनू की मुस्कुराहट में उसकी जीने कि ललक दिखाई देती है। 


आकाश - छोटी सी उम्र में दिल की सर्जरी और भी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करता हुआ ये प्यारा सा बच्चा ज़िंदगी से चाहे कितना भी लड़ा हो पर हार कभी नहीं मानी। आज भी इसकी चंचलता सबका मन मोह लेती है, इसकी हिम्मत और जीने की चाह बड़े से बड़े आदमी को ज़िंदगी का सबक सिखा जाती है।


शैलेन्द्र- शैलेन्द्र जब पालना में आया तो बेहद कमज़ोर था, उसके पैर इतने सक्षम नहीं थे कि वो आगे जाकर कभी चल भी पाए। लेकिन पालना के प्रयास और शैलेन्द्र के आत्मविश्वास से उसके हालातों में काफ़ी सुधार आया और ये उसकी लगन ही थी कि वो अपने पैरों पे खड़े होने की रोज़ कोशिश करता है। उसकी आंखो में सुनहरे कल की उम्मीदें अपनी चमक हमेशा बनाए रखे।